[Countless monkeys report to Sugriva]
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो लक्ष्मणेन महात्मना।
हनूमन्तं स्थितं पार्श्वे सचिवन्त्विदमब्रवीत्।।4.37.1।।
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो लक्ष्मणेन महात्मना।
हनूमन्तं स्थितं पार्श्वे सचिवन्त्विदमब्रवीत्।।4.37.1।।
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